बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

प्यास

प्यास बुझ जाती है एक घूट पानी से
जो न बुझती है प्यास वो है मृगतृष्णा की
जीवन है छलावा ये पता है सबको
फिर भी जीने की प्यास है सबको
दौलत शोहरत की प्यास बहुत तेज होती है
मानवता को मार रिश्तो का खून करती है
नए नए संसाधन को जुटाने में लगे है सभी
पर माँ पिता को पूछने की प्यास नहीं लगती है किसी को
सब मस्त है बाहरी दुनिया में
मरने का सच किसी को जानने की न होती है प्यास
हर समय बेटो की प्यास होती है
बेटी  की प्यास न होती किसी को
नेताओ को होती है कुर्सी की प्यास
अभिनेता को होती है ख्याति की प्यास
बाबाओ को होती है भक्तो  की प्यास
भक्तो को होती है दुःख मिटने की प्यास
दुःख सुख के चक्कर में जो फॅसा
उसे लगती है सहनभूति की प्यास
मन को जगा और बना ले भक्ति की प्यास
प्रेम करो  और प्रेम रुपी रौशनी की प्यास को जगाओ
और पूरे समाज में प्रेम  जगाओ
गरिमा 

रविवार, 18 जून 2017

प्याऱ हीँ ज़िन्दगी है
वो प्यार चाहें पिता का हो 
या किसी और  का 
पिता से बड़ा कोई नहीं है 
पिता आसमान है जिसकी 
छाया में हम बड़े होते है 
पिता हमें सही मार्ग दिखाता है 
जिस पर चलकर हम आगे बढ़ते है 
अपना सुख भूलकर हमें सुख देता है 
ऐसे पिता को जब बच्चे भूल जाते है 
उनको कितनी पीड़ा होती है 
पिता का बड्डपन देखो 
 वो तब भी अपने बच्चो से गिला नहीं करता 
पिता बहुत महान होता है 
सभी पिताओ को मेरा प्रणाम 
-गरिमा 

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

धूप और छाँव

धूप और छाँव की  लुकाछिपी
कितनी अच्छी लगती है
धुप में जब थक जाओ
छाँव शीतलता देती है
धूप जीवन का कठोर समय है
छाँव ढलती शाम है
हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो
कठिन परिश्रम करके तुम अपना
भाग्य बनाते हो
छाँव में जब तुम सबके साथ
अपना समय बिताते हो
कितना अच्छा लगता है
धूप छाँव का ये समय
जीवन का सच है
धूप छाँव का खेल
-गरिमा 

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

शादी

   शादी कितनी अच्छी होती है
सात फेरो का बंधन, सात बचन का महत्व
पर आज शादी  क्या हो गयी है?
शादी हुई नहीं की बीबी पति को अपने साथ रखना चाहती है
शादी का मतलब सिर्फ मौज मस्ती रह गया है
बड़ो का लिहाज़ रह नहीं गया
क्या हो गया है आज सबको
शादी के बाद लोग थोड़े दिन तो सही रहते है
फिर सबके अहम् टकराने लगते है
आज कल की लडकिया भी काम करना चाहती है
दोनों लोगो का अहम् जब टकराता है
तो मामला गड़बड़ हो जाता है
शादी का लड्डू जो खाये पछताए
जो न खाये पछताए
शादी मन का रिश्ता है
जिसे प्रेम से निभाना होता है
-गरिमा 

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

प्यार ही जीवन

प्यार ही जिंदगी है,
प्यार ही हर रंग  है,
प्यार ही मंदिर है,
प्यार ही देवता है ,
पर आज इस प्यार से सब महरूम है
प्यार कहा खो गया
पता नहीं
माँ बेटे के प्यार ,
पिता पुत्री की प्यार ,
भाई बहन का प्यार,
बहुत कम हो गया
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो हवस मात्र रह गयी
हर रिश्ता गन्दा हो गया
पैसा ही प्यार बन गया
पैसा न हो तो पति को पत्नी  अच्छी  नहीं  लगती
पिता को पुत्र अच्छा नहीं लगता
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो बस अब फिल्मो और टीवी में रह गया है
इस प्यार को कहा ढूँढे
ए दिल बता जरा
 प्यार ही जीवन है
ये सच  है कहा
-गरिमा

बुधवार, 18 जनवरी 2017

बर्फ की जिंदगी

बर्फ की जिंदगी कितनी कठिन होती है
हर समय पत्थर  बने रहना,
धूप की जब किरणे परी
तो पिघलना शुरू हो गया
बर्फ से मिलती जिंदगी है
रिश्ते  जिनको हम बर्फ की तरह कठोर बना देते है
हम अपनी मै में खो जाते है
कोई भी बड़ा अपनी धूप  रुपी बुद्धि देना भी चाहे,
तो हम लेना नहीं चाहते
क्यों?
क्योकि हम बर्फ की तरह कठोर हो जाते है
तो हमें सबकी बात खराब लगती है
रिश्ते पूछते है
की क्या हम इसी तरह जमे रहेंगे ?
क्या कोई गर्मी इन रिश्तो  पिघला पायेगी
हर घर में बर्फ जमी है
कोई नहीं चाहता की सूरज की रौशनी पड़े
और रिश्तो पर पड़ी बर्फ पिघलने लगे
-गरिमा

रविवार, 1 जनवरी 2017

नया साल कुछ ऐसा हो

नया साल में नयी चीजे हो
भारत से भूख गरीबी दूर हो
पेप्सी कोला बंद हो
बर्गर पीजा बंद हो
सब लोग भारतीय भोजन करे
महँगाई घटे बेतन बढे
लोगो में भाईचारा हो
भाई भाई से न  लड़े
प्यार ही प्यार बढे
लड़की की हत्या न हो
बहू कोई जलाई न जाये
बहू को बेटी समझा जाये
सांसद लड़ाई न करे
जनता को बुद्धू न बनाये
जनता का हित सब सोचे
उनके दुःख  दर्द सब समझे
बेटा माँ पिता को माने
बहू  सास को माँ माने
सब तरफ प्यार ही प्यार फेले 
ऐसा नया साल हो मेरा
-गरिमा

रविवार, 18 दिसंबर 2016

चौथा मौसम

भारत में चौथा मौसम भी होता है 
जो हर पाँच साल में आता है 
 ये मौसम सबसे अच्छा होता है 
क्योकि इसमें कुछ नए वादे होते है,
जो पाचवे साल ही याद आते है 
जनता बेचारी सोचती है 
की ये मौसम क्यों आता है 
कोई अच्छा काम करे तो भी बुराई होती है 
बार बार वही चुन कर आता है 
जिसके पास वादे होते है 
जनता को लुभाने के लिए 
इस पाँचवे मौसम में तो एक नया वादा आया है 
नोटबंदी से जिनको नुकसान हुआ 
सब उनके साथ है 
इस बार का मौसम जो आ रहा है 
वो क्या रंग लायेगा ?
ये कोई नहीं जानता 
- गरिमा 

सोमवार, 28 नवंबर 2016

जीवन धूप और छाव

कभी धूप तो  कभी छाव है जिंदगी
मीठे खट्टे अनुभव का नाम है जिंदगी
कुदरत की नियामत है जिंदगी
अगर ये  जिंदगी न होती तो क्या होता
नए नए अनुभव देती है जिंदगी
हर नए पाठ पढ़ाती है जिंदगी
जिसे कोई न  समझ पाए वो सबक है जिंदगी
अपने कर्मो के आधार पर चलती है जिंदगी
कोई न जान सके ऐसी पहेली है जिंदगी
किसी के लिए बहुत प्यारी है जिंदगी
किसी के लिए रो रो कर गुजरती है जिन्दगो
हर हाल में खुश रहे ऐसी है जिंदगी
माँ से मिले उपहार है जिंदगी
हम ऐसे ही न बिताए जिंदगी
कुछ कर  दिखाए हम जिंदगी को
दूसरो से हटकर बिताये जिंदगी
जिंदगी भी कहे क्या है जिंदगी
- गरिमा 

गुरुवार, 24 नवंबर 2016

काला धन

आज कल एक ही चर्चा है
काला धन
क्या है ये काला धन
पैसे को कभी काला और सफ़ेद नहीं देखा है
पर सब लोग कह रहे काला धन होता है
धन का कोई रंग नहीं होता
धन तो सबके काम आता है
वो गरीब हो या अमीर
कुछ लोग ऐसे है जो धन को दबा कर रखे है
जो हमारे देश को खोखला कर रहा है
जो हुआ अच्छा हुआ
सरे गरीब और अमीर बराबर हो गए
सबसे ज्यादा तो चोट महिलायो पर लगी
उनका छुपा हुआ धन बहार आ गया
पति सारे खुश हो गए
की उनका पैसा उन्हें मिल गया
धन काला या सफ़ेद नहीं होता
नीयत काली और सफ़ेद होती है
नीयत अच्छी  हो तो सब कुछ अच्छा होता है
गरिमा 

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

दोस्ती का महत्व

दोस्त  कौन  होते है
जो अपने काम आये वही दोस्त होते है
पर आज दोस्ती में स्वार्थ आ गया है
हर कोई मतलबी  है
बहुत कम दोस्त होते है
जो बिना स्वार्थ के काम आये
ऐसे लोग पथ प्रदर्शक होते है
 वो कभी गलत रास्ता नहीं  बताते
ऐसे लोग भगवान  को भी प्यारे होते है
दोस्ती बहुत अनमोल होती है
कुछ भी खो जाये  दोस्ती नहीं खोनी चाहिए
सच्चे दोस्त बहुत कम होते है
दोस्त के दिल में प्यार ही प्यार होता है
दोस्त बनता है हर मुश्किल का सहारा
- गरिमा 

रविवार, 2 अक्तूबर 2016

गाँधी व शास्त्री को नमन

गाँधी व शास्त्री तुम कहा गए
आज आपकी जरुरत फिर भारत माँ  को है
हर तरफ अराजकता का  बोलबाला  है ,
आतंकबाद  का बोलबाला है
न शांति है न चैन है माँ के आँचल में
भारत माँ  ढूंढ रही अपने सपूतो को
गाँधी व शाश्त्री आप फिर  आ जाओ भारत में
 आज आपका जन्मदिन है
इस दिन  भी  अमन चैन नहीं है
सब एक दूसरे के खून के प्यासे है
आओ आज फिर हम सब कसम खाये
गाँधी व शास्त्री का भारत बनाये
यही उनको जन्मदिन की सही बधाई होगी
- गरिमा

शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

पाक को करारा जबाब

ऐ वीर जवानों उठ जाओ
भारत माँ ने ललकारा है.
अब  बहुत हो चुका कतले - आम
अब सबने ललकारा है
कितने निर्दोष आतंकबाद के भेंट चढ़े
माँ  के लाल सो गए गोद में
कब तक सूनी  होगी बहनो की आँखे
अब बदला लेने की बारी  है
अब न करो शांति की बात
वो भाषा आती नहीं पाक को
न करो रहम उन पर
जिन्होंने माता की गोद को असमय उजाड़ा है
अब समय आ गया उनको 
उनकी आकौत दिखाने का
-गरिमा