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नया सवेरा

नया सवेरा आया
बहुत सारी  खुशियाँ  लाया
पर्वत पर छायी लाली
दुनिया में एक नया दिन आया
सब तरफ छायी खुशियाँ
नया सवेरा आया
सबके घर  में आने वाली ढेर सारी खुशियाँ
भागेगा अँधेरा आयेगा उजाला
सबको मिलेगी अपनी मंजिल
गरीबी जायेगी सबके हाथो होगी तरक्की
नया सूरज लाया अपार खुशियाँ
बच्चो को मिली उनकी खुशियाँ
सबको मिला पढ़ने का अधिकार
देश का दिन भी है बदलने वाला
नया सूरज सबके लिए लाया
ढेरो खुशियाँ
हर तरफ है खुशियाँ बिखरी
सबके आँगन महका
नया सवेरा आया

हिंदी की दुर्दशा

एक और हिंदी दिवस आ गया
और हमने हिंदी को  याद कर  लिया लिया
 तो क्या मात्र हिंदी दिवस
मना लेने से इतिश्री होगा
 हिंदी  की   दुर्दशा का  क्या  कहना
आज तो अंग्रेजी भी  हिंदी में मिलने लगी है
  आलम यह है कि हर जगह 
अंग्रेजी  का असर है
अब तो हिंदी भी अंग्रेजी का गुलाम हो गयी है,
आज हिंदी रोती है
कि आने वाली मुझे कैसे समझेगी
मात्र हिंदी दिवस पर हिंदी को याद
कर लेना काफी नहीं
हिंदी चीखकर कह रही है
कि मुझे बचाओ ! मुझे बचाओ
पर उसकी चीख सुनकर भी हम
अनसुना कर देते है